Sunday, February 22, 2015

मेरी गुड़िया तेरा गुड्डा

मेरी गुड़िया तेरा गुड्डा
चल करते हैं शादी
तुम बनना गुड्डे के अब्बा
मैं गुड़िया की दादी।

फटा दुपट्टा दीदी का
अम्मा की पीली साड़ी
लहंगा,गोटे,चुनरी से
सँवरी यह राजदुलारी ।

शादी तो कर देंगे हम
पर क्या खिलाएं खाना,
कहॅा से लाएँ मेज व कुर्सी
कहॅा सजे शमियाना।

अक्ल सुझाई चंपक ने
छोड़ो यह ताना बाना।
मैं लाता हुँ बिस्कुट घर से
टॅाफी तुम ले आना।

-उपासना-
 (चित्र- गूगल से साभार)

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